ऐ कवि कविता नहीं
अपने समय की चिंता लिखो
सब लिखते हैं गहरा समुंदर
तुम डूबे को तिनका लिखो!
- इस देश ने जितना मार्क्स को पढ़ा, समझा, और अपने मे गूथा-ठूसा, उतना अगर गाँधी जी को पढ़ा समझा होता तो शायद पीढ़ियों का सबक कुछ और होता!
- सूर्य की रौशनी में जितनी भी चीजें दिखाई दे रही हैं, वो सब यूपीएससी का सलेबस है।
- इस देश ने जितना मार्क्स को पढ़ा, समझा, और अपने मे गूथा-ठूसा, उतना अगर गाँधी जी को पढ़ा समझा होता तो शायद पीढ़ियों का सबक कुछ और होता!
- एक स्त्री के देह के साथ बलात्कार एक बार होता है मगर उसकी चेतना में वो बलात्कार बार-बार होता है, यह एक ऐसा मामला है जिसमें आप दोषी को तो सज़ा दे सकते हैं लेकिन पीड़िता को न्याय नहीं दे सकते!
- असल में एक सिविल अभ्यर्थी बेटे और बाप के बीच रिश्ते का आधार इन्हीं दो परम सत्य के आस-पास मँडराता है। पिता पैसे को लेकर निश्चिन्त करता है और बेटा परिणाम को लेकर!
- हम जिसे गांव में "मिट्टी" कहते हैं, शहर में उसे "धूल" कहते हैं।
- प्राईमरी का शिक्षक सुबह की एक कप चाय से दिनभर फुर्ती रखने की अदभुत क्षमता रखता है ,जो अक्सर वह अपने घर पर नहीं पीता!
- लेखक, सत्ता का सबसे मखमली विपक्ष होता है।
- "टच स्क्रीन की जीवनशैली वाली पीढ़ी जब जात-पात के नाम पर टच करने से परहेज कर रही होती है तो सारी प्रगतिशीलता और आधुनिकता एक छलावा लगने लगती है।
- आत्मा के छलनी हो जाने को सांत्वना रफ्फू नहीं कर सकता ।
- भारत में सबसे ऊपर की जाति तो खोजी जा सकती थी पर सबसे निचली जाति खोजना अभी तक बाक़ी था। यहाँ हर जाति के लिये कोई न कोई जाति अछूत थी, इस क्रूर सत्य से नजर नहीं फेरा जा सकता था।

