मुझको तुम मत काटो प्यारे

हम हैं तुम सबके रखवारे ।


हम नभ में बदरा लाते हैं

बरखा फिर हम करवाते हैं

धरती पर छाए हरियाली

खुशियां फैले द्वारे-द्वारे ।


प्राणवायु, फल, औषधि देते

बदले में कुछ भी ना लेते

जीवनदाता हम कहलाते

हमसे हैं जग के जन सारे ।


अपने स्वार्थ को त्यागो तुम

मत काटो पछताओगे तुम

हम भी तो हैं जीव जगत के

नाहक बनते क्यूँ हत्यारे ।।