जिसने धर्म की रक्षा के लिए लड़ाई की
अपनी जान की ना उसने परवाह की
अंग्रेजों के आगे सिर न झुकाया
देश के लिए जान कुर्बान की
खुद ही अकेले विरोध छेड़ दिया
सभी साथियों को इकट्ठा करके युद्ध किया
मंगल पांडे ने अंग्रेजों का विरोध किया
देश के लिए उन्होंने संघर्ष किया
गाय सूअर की चर्बी का इस्तेमाल ना करो
हमारा धर्म तुम नष्ट ना करो
खुद ही अकेले विरोध छेड़ दिया
सभी साथियों को इकट्ठा करके युद्ध किया
जिसने धर्म की रक्षा के लिए लड़ाई की
अपनी जान की ना उसने परवाह की
अंग्रेजों के आगे सिर न झुकाया
देश के लिए जान कुर्बान की
मंगल पांडे जिन्होंने अपने देश को स्वतंत्र कराने के लिए काफी प्रयास किया था और अंग्रेजों से युद्ध किया था। मंगल पांडे जी का भारत की पहली क्रांति 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान था इनका जन्म नगवा नामक गांव में हुआ था ये लगभग 22 साल की उम्र में ही ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में भर्ती हुए थे। ये ब्राह्मण जाति के थे उन्होंने अपने जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना किया और जब उन्हें पता लगा कि अंग्रेज हमारे धर्म को भ्रष्ट कर रहे हैं तभी से उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई और उनके विरुद्ध क्रांति छेड़ दी।उन्होंने अपने देश को आजाद कराने के लिए काफी कोशिश की लेकिन अंत में अंग्रेजो के द्वारा उन्हें फांसी दे दी गई लेकिन क्रांति की लहर भारत के लोगों में ये फेला गये थे और कुछ ही समय बाद हमारा देश आजाद हो गया वास्तव में हम इस महान स्वतंत्रता सेनानी के बलिदान को कभी नहीं भूल पाएंगे चलिए पढ़ते हैं उनके विचारों को:
- यह आजादी की लड़ाई है गुजरे हुए कल से आजादी, आने वाले कल के लिए
- आज तक आपने हमारी वफादारी देखी थी अब आप हमारा क्रोध देखिए
- बंदूक बड़ी बेवफा माशूका होती है वह कब किधर मुंह मोड़ ले इसका कोई भरोसा नहीं
- जब आप अपने देश की रक्षा करते हैं तो धर्म की रक्षा स्वयं ही हो जाती है
- हमारी स्वतंत्रता के लिए लड़ाई एक चिंगारी है जो पूरे विश्व में विकराल रूप लेगी
- हर इंसान को अपने धर्म की रक्षा जरुर करनी चाहिए

