हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी

जिस को भी देखना हो कई बार देखना

निदा फ़ाज़ली


इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले

ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले

नादिम नदीम


वो ताज़ा-दम हैं नए शो'बदे दिखाते हुए

अवाम थकने लगे तालियाँ बजाते हुए

अज़हर इनायती


ये सच है रंग बदलता था वो हर इक लम्हा

मगर वही तो बहुत कामयाब चेहरा था

अम्बर बहराईची


इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले

ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले

नादिम नदीम


मुझ से क्या बात लिखानी है कि अब मेरे लिए

कभी सोने कभी चाँदी के क़लम आते हैं

बशीर बद्र


इश्क़ में भी सियासतें निकलीं

क़ुर्बतों में भी फ़ासला निकला

रसा चुग़ताई


मेरे सय्याद की तालीम की है धूम गुलशन में 

यहां जो आज फंसता है वो कल सय्याद होता है

-अकबर इलाहाबादी 


बागबां ने यह अनोखा सितम ईजाद किया

आशियां फूक के पानी को बहुत याद किया

-चकबस्त


शायद मुझे निकाल कर पछता रहे हैं आप 

महफिल में इस ख्याल से फिर आ गया हूं मैं

-अदम


कहां तो तय था चिरागां हर एक घर के लिए 

कहां चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए 

-दुष्यंत कुमार 


कच्चे मकान जिनके जले थे फसाद में

अफसोस उनका नाम ही बलवाइयों में था

-नईम 'जज्बी' 

 

जंग में कत्ल सिपाही होंगे 

सुर्खरू जिल्ले-इलाही होंगे

-'मौज' रामपुरी


यहां तो सिर्फ गूंगे और बहरे लोग बसते हैं

खुदा जाने यहां पर किस तरह जलसा हुआ होगा 

-दुष्यंत कुमार 


कैसे कैसे हैं रहबर हमारे

कभी इस किनारे, कभी उस किनारे

-'राज' इलाहाबादी 


खैर हो उस मुसाफिर की जिसके लिए

आज हर राहजन पासबां बन गया

-वामिक जौनपुरी


मस्जिद की अजां हो कि शिवाले का गजर हो 

अपनी तो ये हसरत है कि किसी तरह सहर हो 

-कतील शिफाई


ऐ काफिले वालो, तुम इतना भी नहीं समझे 

लूटा तुम्हें रहजन ने, रहबर के इशारे पर 

-तरन्नुम कानपुरी 


गर अम्न की खतिर हो तो जंग है बेहतर 

गर जंग हो मकसद तो सियासत नहीं अच्छी

-राज नोमानी 


जो बागबां फूलों का वफादार नहीं है 

गुलशन की हिफाजत का वो हकदार नहीं 

-फिरोज राहत 


घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे

बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला 

-बशीर 'बद्र'


जितने भी लफ्ज हैं वो महकते गुलाब हैं

लहजे के फर्क से इन्हें तलवार मत बना

-'कतील' शिफाई