कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन 

फिर इस के बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर 

- निदा फ़ाज़ली


अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल

हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया

- जिगर मुरादाबादी


चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल

हौसला किस का बढ़ाता है कोई

- शकील बदायुनी


चले चलिए कि चलना ही दलील-ए-कामरानी है

जो थक कर बैठ जाते हैं वो मंज़िल पा नहीं सकते

- हफ़ीज़ बनारसी


देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार

रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख

- मजरूह सुल्तानपुरी


गुमशुदगी ही अस्ल में यारों राह-नुमाई करती है

राह दिखाने वाले पहले बरसों राह भटकते हैं

- हफ़ीज़ बनारसी


प्यासे रहो न दश्त में बारिश के मुंतज़िर 

मारो ज़मीं पे पाँव कि पानी निकल पड़े 

- इक़बाल साजिद


यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है 

हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है 

- मंज़ूर हाशमी


हयात ले के चलो काएनात ले के चलो

चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो

- मख़दूम मुहिउद्दीन


ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले

ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

- अल्लामा इक़बाल