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होली - नरेंद्र शर्मा

KavishalaKavishala March 17, 2022
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खेल रहा होली, शर भर भर

तेजस का तूणीर!

बेध रहा भूरज की देही

सूरज अमित अधीर!

प्राणशक्ति का धनुष बनाया,

तेज-बीज के बान!

तरुण अरुण रवि उगा क्षितिज पर

भोर बनी मुस्कान!

वल्कलधारिण धरा किरातिन

रवि किरात रणधीर!

खेल रहा होली, शर भर भर

तेजस का तूणीर!

मदोन्मत्त फाल्गुन फिर आया,

फिर रंजिश नभ नील!<

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