Father's Day Shayari's image

इन का उठना नहीं है हश्र से कम, घर की दीवार बाप का साया

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घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा 

ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे 

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बाप ज़ीना है जो ले जाता है ऊँचाई तक 

माँ दुआ है जो सदा साया-फ़गन रहती है 

[सरफ़राज़ नवाज़]


बच्चे मेरी उँगली थामे धीरे धीरे चलते थे 

फिर वो आगे दौड़ गए मैं तन्हा पीछे छूट गया 

[ख़ालिद महमूद]


हड्डियाँ बाप की गूदे से हुई हैं ख़ाली 

कम से कम अब तो ये बेटे भी कमाने लग जाएँ 

[रऊफ़ ख़ैर]


हमें पढ़ाओ न रिश्तों की कोई और किताब 

पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हम ने 

[मेराज फ़ैज़ाबादी]


सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है 

जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माओं की 

[हम्माद नियाज़ी]


देर से आने पर वो ख़फ़ा था आख़िर मान गया 

आज मैं अपने बाप से मिलने क़ब्रिस्तान गया 

[अफ़ज़ल ख़ान]


मैं अपने बाप के सीने से फूल चुनता हूँ 

सो जब भी साँस थमी बाग़ में टहल आया 

[हम्माद नियाज़ी]


मेरा भी एक बाप था अच्छा सा एक बाप 

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