पूरी धरा भी साथ दे तो और बात है

पर तू ज़रा भी साथ दे तो और बात है

डॉ. कुंवर बेचैन का जाना मेरे खुद के लिए एक बड़ी क्षति है, कुछ मुलाकातों ने इतना कुछ सिखा दिया था की उनसे बहुत कुछ सीखने की जिज्ञासा होने लगी थी, नहीं पता था की कविशाला द्वारा 'लाइफ टाइम अचीवमेंट' अवार्ड हमारे लिए आखिरी मुलाकात होगी! लोगो ने उनसे कविताओं के बारे में सीखा होगा मगर मै जब भी मिलता था कोशिश होती थी की जिंदगी के बारे के कुछ और सीख पाऊं, इतने सारे मुकाम हासिल करने के बाद 'साधारण' कैसे रहा जाता है यह सीख पाऊं, उपलब्धियों को कैसे सहेजा जाता है यह सीख पाऊं, उनसे यह सीख पाऊं आप इतना सब करने के बाद इतना सरल कैसे रह लेते हैं! मै आजकल के कुछ कवियों और लेखकों को देखता हूँ जिन्होंने चंद कविताओं और किताबो के बाद अपने अंदर घमंड की एक बड़ी दुकान बना ली है लेकिन आपने लाखो कविताएँ लिख दी, सैकड़ों किताबें लिख दी, हजारो कवि-सम्मेलनों में कविताएँ पढ़ दी फिर भी आपके अंदर एक जो सामान्य व्यक्ति रहता है, उसको कैसे आपने बनाए रखा है?'

मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यूँ डर रखूँ

ज़िंदगी आ तेरे क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ

डॉ कुंवर बेचैन एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने मेरी व्यक्तिगत जिंदगी में एक अलग छाप छोड़ दी! कविताओं से परे की दुनियाँ के बारे में जब उनके साथ बैठकर बात हुयी तो यह महसूस हुआ की एक ऐसा व्यक्ति जिसने हजारो कवि सम्मेलन में सिरकत की हो, जिसने न जाने कितने लोगो को कवितायेँ सिखाई है न जाने कितने लोगो के लिए आदर्श हैं और उस व्यक्ति के अंदर जैसे कोई बिल्कुल सामान्य व्यक्ति निवास करता हो! जब भी उनके घर जाना हुआ, उनके द्वारा हर ५ मिनट में यह पता करना की आप कहा पहुंचे हो, कहीं रास्ता तो नहीं भटक गए, आप फोन पर ही रहिये मै आपको रास्ता बताता रहूँगा....

शायद ही किसी व्यक्ति में इस तरह का व्यक्तित्व मैंने देखा था! डॉ कुंवर बेचैन जिनकी कविताओं को सुनकर हम बड़े हुए है, जिनकी कविताओं को पाठ्यक्रम में लोग पूजते है ऐसे व्यक्ति द्वारा उनके घर के स्वागत को मै कैसे भूल सकता हूँ, खाने और चाय के लिए बार बार पूछना अपने हाथो से चाय बनाना, एक अपने बच्चो से ज्यादा प्यार करना वास्तव में कोई महान व्यक्ति ही कर सकता है! जो-जो लोग भी डॉ कुंवर बेचैन से मिले होंगे वास्तव में उनके व्यक्तित्व के फैन होंगे, बिना कुछ विशेष जताये हुए इतना विशेष कर जाना, लाखो कविताओं के लेखक के द्वारा सराहनीय और पूज्यनीय है!


'क्या ऐ सूरज, तेरी औक़ात है इस दुनिया में

रात के बाद भी इक रात है इस दुनिया में।

शाख से तोड़े गए फूल ने हँसकर ये कहा :

अच्छा होना भी बुरी बात है इस दुनिया में।'



साहित्य की शुरुआत के बारे में बताते है, दो महीने की आयु में उनके पिता की मृत्यु हो गयी और शादी के बाद उन्होंने कविताओं का लिखने का सिलसिला शुरू किया! उसके अलावा भी कई बातें हैं जो हमें जानना अत्यंत आवश्यक है: