चुप चुप चुप चुप

चुप चुप चुप चुप

नस नस में

रग रग में चुप चुप

आवाज़ों पर विष की वर्षा

काल करेगा वरना गुपचुप

चुप चुप चुप चुप

चुप चुप चुप चुप

नख में कख में

नाभि में चुप

ताले कुंडी

चाभी में चुप

चुप हुंकार भी

चुप मिमियाना

चोटें चुप और

चुप सहलाना

चुप ही सागर

चुप ही दलदल

चुप बुलडोज़र

बस्ती समतल

चुप ही आधी रात गली की

चुप सुनसान सा कोना

चुप ही सहमा बचता मानव

चुप चक्कू इक पैना

चुप ही मूक खड़ा वो दर्शक

चुप शर्मिंदा आँखें

चुप मंज़िल की चुप खिड़की से

जो चुपके से झाँकें

चुप ही आतम चुप परमातम

चुप ही हंस अकेला

चुप के मोहरे दोनों बाज़ू

चुप ही हारे खेला