एक सार्थक और ज्ञानवर्द्धक चर्चा के लिए एक प्रश्न रख रहा हूँ।मुझे यक़ीन है कि आप सभी सहयोग करेंगे तो यह एक अत्यंत उपयोगी #thread बनेगा, विशेषकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले मित्रों के लिए।
उदाहरण, संदर्भ आदि के साथ कृपया संतुलित और संयमित भाषा में तर्कसंगत बात रखें!
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एक सार्थक और ज्ञानवर्द्धक चर्चा के लिए एक प्रश्न रख रहा हूँ।मुझे यक़ीन है कि आप सभी सहयोग करेंगे तो यह एक अत्यंत उपयोगी #thread बनेगा, विशेषकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले मित्रों के लिए।
— Dr. JK Soni, IAS (@Jksoniias) December 6, 2020
उदाहरण, संदर्भ आदि के साथ कृपया संतुलित और संयमित भाषा में तर्कसंगत बात रखें। pic.twitter.com/KArxVy4PXE
सभी लेखक साथियों और अग्रजों से विनम्र निवेदन है कि कृपया इस विषय पर आपके विचार जरूर लिखें।
— Dr. JK Soni, IAS (@Jksoniias) December 6, 2020
भाषा का यह प्रश्न लोकसंस्कृति का तो है ही,साथ ही साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और रोज़गार से भी जुड़ा है।@akparlika @kavitakosh @kavitaaayein @atulkanakk @DrKumarVishwas @khayalisaharan
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— Dr. JK Soni, IAS (@Jksoniias) December 7, 2020
दो स्पष्टीकरण-
⭕️#राजस्थानी की पृथक लिपि नहीं है
-देवनागरी है जो हिंदी,नेपाली,मराठी आदि कई भाषाओं की भी है
⭕️यह स्वयं बोली है/इसकी बहुत सारी बोलियां हैं
-बतौर एक भाषा यह इसकी खूबी है!हिंदी, पंजाबी आदि में भी अनेक बोलियां और उपबोलियां हैं
साथियों से निवेदन कि चर्चा जारी रखें
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— Dr. JK Soni, IAS (@Jksoniias) December 7, 2020
तीसरा स्पष्टीकरण-
⭕️कई बोलियां हैं #राजस्थानी में,सो इसका मानक रूप नहीं है
-प्हिंदी को अपनाए जाने के बाद भी सालों तक मानक रूप, वर्तनी और शब्दों पर काम चलता रहा था,अब भी चल ही रहा है!जैसे-
▶️ 1947 में आचार्य नरेन्द्र देव की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने बारहखड़ी,
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— Dr. JK Soni, IAS (@Jksoniias) December 7, 2020
मात्रा,अनुस्वार व अनुनासिक से संबंधित महत्त्वपूर्ण सुझाव दिएl
▶️ शिक्षा मंत्रालय ने कई स्तरों पर प्रयास किए हैं।सन् 1966 में मानक देवनागरी वर्णमाला,1967 में ‘हिंदी वर्तनी का मानकीकरण’ और 1983में ‘देवनागरी लिपि तथा हिन्दी की वर्तनी का मानकीकरण’ प्रकाशित किया गया।
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— Dr. JK Soni, IAS (@Jksoniias) December 7, 2020
आज़ादी के बाद हिंदी के मानक रूप,लिपि,वर्तनी आदि पर लगातार बौद्धिक-भाषिक काम हुआ!
संवैधानिक मान्यता के बाद यह काम राजस्थानी हेतु भी इसी तरह हो जाएगा!
सनद रहे कि जब अपने ही किसी चीज को खोटा बताने लगे तो फिर दूसरों से उसी चीज को सोना बताए जाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए

