पंडित जी का जन्मदिन है आज! 'मिर्जापुर वेब सिरीज' में सिनेमा में सच्चाई और ईमानदारी जैसे मूल्यों के लिए लड़ने वाले एक जिम्मेदार बाप की भूमिका निभाने वाले इस कलाकार की आत्मा प्रेम के रंगों में भीगी हुई है, जो छनकर उनकी कविताओं में सामने आती है:


(1)

चिता जला दी

भावनाओं की

कविता बना दी

भावनाओं की

बहा दिए फूल

काग़ज़ के,

मैने गंगा में।

मेरी मुक्ति मुझइक लकड़ी की कलम से मिल


(2)

अमावस की रात पैदा हुआ मैं

मौत मुझे पूनम को आये

आस मेरी रही घटती-बढ़ती

अब आये , तुम तब आये

चाँद के पापड़ सेंकना

ज़रा नाज़ुक सा काम है

तुझे इकटक बैठे देखना

ज़रा नाज़ुक सा काम है


(3)

गर नज़्म पढ़ते हुए

ज़ुबां का ज़ायका नहीं बदलता

तो बावर्ची को इल्ज़ाम देना


(4)

नज़्म वो नहीं

जो काग़ज़ पे लिखी जाती है

नज़्म वो काग़ज़ की कश्ती है

जो ख़यालात की बारिश में

अहसास की लहरों में

डगमगाती है


(5)

प्रवासी पाखी के जैसे

निकल गया था प्रेम तेरा

झील में मछलियों का

शिकार करके


(6)

यादों की जलेबी में तुम्हारी

भिनभिना रही हैं मक्खियां

लफ़्ज़ों की

कविताओं की दुकान में बिक्री

आजकल कम है


(7)

इक मंज़िल की जानिब चला था

तुम मिल गईं किसी एक मोड़ पे

और फिर रास्ता ही मंज़िल हो चला


(8)

अमावस की रात पैदा हुआ मैं

मौत मुझे पूनम को आये

आस मेरी रही घटती-बढ़ती

अब आये , तुम तब आये