आप आएं तो कभी गांव की चौपालों में

मैं रहूं या न रहूं, भूख मेजबां होगी

-अदम गोंडवी 

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वो जो पिछले साल सब खेतों को सोना दे गया

अब के वो तूफ़ान किस किस का मकाँ ले जाएगा

- क़मर जलालाबादी

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चोरी न करें झूठ न बोलें तो क्या करें

चूल्हे पे क्या उसूल पकाएंगे शाम को

-अदम गोंडवी

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खेत अभी भी बंजर हैं

नैनों में था रास्ता, हृदय में था गांव

हुई न पूरी यात्रा, छलनी हो गए पांव

-निदा फ़ाज़ली

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ख़ोल चेहरों पे चढ़ाने नहीं आते हमको

गांव के लोग हैं हम शहर में कम आते हैं

-बेदिल हैदरी

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जो मेरे गांव के खेतों में...

जो मेरे गांव के खेतों में भूख उगने लगी

मेरे किसानों ने शहरों में नौकरी कर ली

-आरिफ़ शफ़ीक़

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धान के खेतों का सब सोना किस ने चुराया कौन कहे

बे-मौसम बे-फ़स्ल अभी तक इस इज़हार की धरती है

- हकीम मंज़ूर

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सुना है उसने खरीद लिया है करोड़ों का घर शहर में 

मगर आंगन दिखाने आज भी वो बच्चों को गांव लाता है 

-अज्ञात

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खींच लाता है गांव में बड़े बूढ़ों का आशीर्वाद,

लस्सी, गुड़ के साथ बाजरे की रोटी का स्वाद

- डॉ सुलक्षणा अहलावत

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शहरों में कहां मिलता है...

शहरों में कहां मिलता है वो सुकून जो गांव में था,

जो मां की गोदी और नीम पीपल की छांव में था

-डॉ सुलक्षणा अहलावत

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यूं खुद की लाश अपने कांधे पर उठाये हैं

ऐ शहर के वाशिंदों ! हम गाँव से आये हैं

-अदम गोंडवी 

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आप आएं तो कभी गाँव...

आप आएं तो कभी गाँव की चौपालों में

मैं रहूँ या न रहूँ, भूख मेजबां होगी

-अदम गोंडवी 

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चीनी नहीं है घर में, लो, मेहमान आ गये

मंहगाई की भट्ठी पे शराफत उबाल दो

-अदम गोंडवी 

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घर के ठंडे चूल्हे पर खाली पतीली है

बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है

-अदम गोंडवी 

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मेरे खेत की मिट्टी से पलता है

मेरे ख़तों को जलाने से कुछ नहीं होगा

हवा में राख उड़ाने से कुछ नहीं होगा

- सीमा शर्मा मेरठी

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गाँव की आँख से बस्ती की नज़र से देखा 

एक ही रंग है दुनिया को जिधर से देखा 

- असअ'द बदायुनी

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मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट

मेरा नादान गांव अब भी उलझा है किश्तों में  

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मत मारो गोलियों से मुझे मैं पहले से एक दुखी इंसान हूँ,

मेरी मौत कि वजह यही हैं कि मैं पेशे से एक किसान हूँ

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अब कहाँ वो मुलाकात करते हैं

किसानों से अब कहाँ वो मुलाकात करते हैं,

बस ऱोज नये ख्वाबों की बात करते हैं

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एक बार आकर देख कैसा, ह्रदय विदारक मंजर हैं,

पसलियों से लग गयी हैं आंतें, खेत अभी भी बंजर हैं