वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन 

उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा 

- साहिर लुधियानवी


हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं 

हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं 

- जिगर मुरादाबादी


मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर 

लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया 

- मजरूह सुल्तानपुरी


जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा 

किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता 

- वसीम बरेलवी


सितारों से आगे जहाँ और भी हैं 

अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं 

- अल्लामा इक़बाल


ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले 

ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है 

- अल्लामा इक़बाल


दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है 

लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है 

- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़


और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा 

राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा 

- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़


कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं 

नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है 

- अमीर मीनाई