वृन्दां वृन्दावनीं विश्वपावनीं विश्वपूजिताम्!

पुष्पसारां नन्दिनीं च तुलसीं कृष्णजीवनीम्!!


एतन्नामष्टकं चैतस्तोत्रं नामार्थसंयुतम्!

यः पठेत्तां च संपूज्य सोऽश्वमेधफलं लभेत्!!

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भगवान नारायण देवर्षि नारदजी से कहते हैं- "वृंदा, वृंदावनी, विश्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी – ये तुलसी देवी के आठ नाम हैं। यह सार्थक नामवली स्तोत्र के रूप में परिणत है। जो पुरुष तुलसी की पूजा करके इस नामाष्टक का पाठ करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।" (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड 22.32-33)


'घर-घर तुलसी लगाओ' अभियान

25 दिसम्बर से पहले तुलसी का पौधा हर घर में पहुँचे ताकि हर कोई इस पुण्य-स्वास्थ्य प्रदायक, धन-धान्य-सौभाग्य वर्धक, हृदय में भगवद्भक्ति उत्पन्न करने वाले पूजन का लाभ ले सकें। बापू जी द्वारा चलाया गया यह लोकहितकारी दैवी कार्य खूब व्यापक हो और समस्त विश्वमानव इससे लाभान्वित हो इस उद्देश्य से महिला उत्थान मंडल द्वारा घर-घर तुलसी लगाओ अभियान शुरु किया गया है!



प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है। तुलसी पूजन दिवस की शुरुवात आसारामजी बापू ने वर्ष 2014 में की थी। तुलसी केवल एक पौधा ही नहीं बल्कि धरा के लिए वरदान है और इसी वजह से हिंदू धर्म में इसे पूज्यनीय माना गया है। धनुर्मास में सभी सकाम कर्म वर्जित होते हैं परंतु भगवत्प्रीतिर्थ कर्म विशेष फलदायी व प्रसन्नता देने वाले होते हैं। 25 दिसम्बर धनुर्मास के बीच का समय होता है।