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'... और कुछ पन्ने कोरे रह गए : इरफान' - अजय ब्रह्मात्मज

एक ऐसी किताब जिसका इंतज़ार लगभग हर पाठक को होगा, अब आपके सामने है! इरफ़ान एक ऐसी शख़्सियत जिससे मिलने और बात करने की इच्छा सबकी हमेशा से रही होगी! उनकी व्यक्तिगत जिंदगी किस तरह से रही है इस किताब के जरिये आसानी से समझा जा सकता है, अजय ब्रह्मात्मज की इरफ़ान से बातचीत और उनकी जिंदगी को समझकर सरल और आसान भाषा में पाठको तक पहुँचाना सराहनीय काम है! किताब का पहला संस्करण तुरंत ख़त्म हो जाने के बाद अब दूसरा संस्करण आ चुका है, किताब जरूर पढ़े!

अजय ब्रह्मात्मज '... और कुछ पन्ने कोरे रह गए : इरफान' के लिए कहते हैं: इतनी देर में क्या बातें हुई ये याद नहीं,लेकिन यह मैं कभी नहीं भूल सकता कि इस जादुई कलाकार ने हम अनुभवहीन लेखकों के साथ सह कलाकारों सा बर्ताव किया,इज्जत दी,और हमारे हड़बड़ाए से सवालों के बावजूद हमें नौसिखिया नहीं महसूस कराया।

इरफान की बातों और यादों को समेटती ' ... और कुछ पन्ने कोरे रह गए : इरफान' सभी फिल्म और इरफान प्रेमियों के लिए एक जरूरी पुस्तक है। यह उनकी जीवनी नहीं है। इसमें उनके साक्षात्कार और उन पर लिखे संस्मरण हैं। यह पुस्तक इरफान के अनोखे व्यक्तित्व को उन्हीं के शब्दों में उभारती है। उनके मित्रों-परिचितों के संस्मरण उनके व्यक्तित्व के अनेक पहलुओं को व्यक्त करते हैं। इरफान को जानने-समझने के लिए यह एक अंतरंग पुस्तक है।



क्या कहते हैं पाठक:

  • यह इंटरव्यू और संस्मरणों की किताब है: विजय
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