कई दशकों से यह कहा जा रहा है कि हमारा समय कविता का समय नहीं है जबकि कविता का कोई विशेष समय नहीं होता । हर समय कविता का समय है और अकसर कविता समयविद्ध होकर समयातीत की ओर जाती है जो एक स्वाभाविक मानवीय आकांक्षा का हिस्सा है । कई बार यह हमारे ध्यान में नहीं आता कि कविता ही वह प्रकार है जो अच्छे–बुरे दिनों में हमारा साथ देती है, कविता ने मनुष्य का साथ कभी नहीं छोड़ा । अगर कौशल और दृष्टि हो तो जीने का हर मुकाम, पूरा–पड़ोस, लोग–बाग, पशु–पक्षी, वनस्पतियाँ, नदी–पर्वत, जंगल, ब्रह्माण्ड आदि सभी कविता में बान्धे जा सकते हैं । कविता ने अपने लम्बे इतिहास में ऐसा साहस किया है । वह साक्षी भी रही है और सहचर भी । लेखक के काव्य–प्रयत्न को व्यापक सन्दर्भ में देखने की जरूरत है । उनका रेंज काफी फैला हुआ है । टटकी छबियों से लेकर गंभीर सोच–विचार और जटिल भावों तक, ऐन्द्रिय बिम्बों से लेकर सपाटबयानी तक । वे अपने पर्यावरण से रूप–रस–गन्ध उधार लेने की विनम्रता दिखाते हैं और उसके लगातार हो रहे नाश पर कविता में विलाप भी । कुल मिलाकर एक संवेदनशील व्यक्ति की चैकन्नी नागरिकता का यह संग्रह एक दस्तावेज है । -- अशोक वाजपेयी


रेगमाल डा जितेंद्र सोनी का कविता संग्रह है। जितेंद्र सोनी अपनी कविताओं में कोई बड़ी बात नहीं कहते वे छोटी छोटी बातों से बड़े बिंब बुनते हैं। बड़े मुद्दों को उठाते हैं जो व्यक्ति व समाज के रूप में समय समय पर हमें झिंझोड़ते रहते हैं। उनकी कविताओं की विशेषता उनका सरल सहज होना ही है। यह पुस्तक उनके अद्भुत रचना कौशल का परिणाम है। सोनी आई.ए.एस ऑफ़िसर होते हुए भी अपनी अभिरुचि के लिए समय निकाल पा रहे हैं,यह उन युवाओं के लिए सीख है जो हर बात पर समय कम का बहाना बनाते हैं।सोनी जी इसी प्रकार से कुशलता से प्रशासनिक कार्यों को करते हुए अपनी रचनाधर्मिता के साथ भी न्याय करते रहें।