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वो किताब जिसके लिए मुंशी प्रेमचंद को अंग्रेजो ने देशद्रोही करार दिया

प्रेमचंद (31 जुलाई 1880 – 8 अक्टूबर 1936) हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे.उनकी रचनाएँ हिंदी तथा उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं. उनकी रचनाओं से न केवल हिंदी साहित्य समृद्ध हुआ बल्कि उनकी रचनाओं ने सामाजिक क्रांति की नीव रखी. मुंशी प्रेम चंद ने बुराई, अन्याय और असामनता के खिलाफ निर्भीकता से अपनी कलम चलाई है. 

 

प्रेमचंद के साहित्यिक जीवन का आरंभ 1901 से हो चुका था. प्रारम्भ में वे नवाब राय के नाम से उर्दू में लिखते थे. बाद में उन्होंने हिन्दू-उर्दू दोनों भाषाओँ में लिखना शुरू किया. प्रेम चंद का स्वभाव क्रन्तिकारी था, वे किसी भी बुराई को देखते तो अपनी लेखनी के द्वारा उसका विरोध करते थे. उनकी लेखनी से तत्कालीन ब्रिटिश सरकार उनसे खफा रहती थी.


सोजे वतन (कहानी संग्रह) के लिए प्रेमचंद को देश द्रोही करार दिया;- 1908  ई. में उनका पहला कहानी संग्रह सोज़े-व

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