[Kavishala Talks] 12 August 2020 जाने माने फिल्म निर्माता लेखक व कवि मनीष मुंद्रा कविशाला टॉक का हिस्सा बने. उन्होंने अपने प्रारम्भिक जीवन संघर्ष , अपने कवि बनने के पीछे की कहानी और वर्तमान साहित्य व कविताओं के बारे में चर्चा की .कविशाला टॉक में उन्होंने अपनी आने वाली तीन फिल्मे और अपनी आगामी किताब के बारे में भी बताया. प्रस्तुत हैं मनीष मुंद्रा के साथ कविशाला टॉक के कुछ अंश-

बचपन से रहा फिल्मो से लगाव :- मनीष मुंद्रा ने बताया कि उन्हें बचपन से ही फिल्मो में काफी रूचि थी. उनके बचपन का सपना था कि वे फिल्मो में काम करेंगे. मनीष मुंद्रा देवघर (झारखण्ड) से है. उन्होंने बताया कि उनके गांव में एक मंदिर था जहाँ सावन के महीने में सूचना प्रसारण विभाग द्वारा प्रोजेक्टर पर फिल्मो दिखाई जाती थी. यहीं से उनके मन में फिल्मो को लेकर दिलचस्पी बढ़ी.  कविशाला से मिली किताब प्रकाशित करवाने की प्रेरणा:- कविशाला के बारे में मनीष मुंद्रा के कहा कि कविशाला एक प्रबल कोशिश है, जो एक क्रांति का रूप ले चुकी है, कविशाला नए कवियों के लिए अच्छा मंच है. उन्होंने कहा कि कविशाला की वजह से मै अपनी किताब (कुछ अधूरी बातें मन की) संकलित कर पाया. कविशाला ने मेरी कविताएं साझा की, लोगो ने पढ़ीं और मेरी कविताओं की सराहना की तो मुझमे किताब प्रकाशित करने की हिम्मत आयी.जल्दी आएँगी ये तीन फिल्मे: मनीष मुंद्रा ने अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में बात करते हुए बताया कि अभी उनकी तीन फिल्मे (आधार, राम प्रसाद की तेरहवी और ट्रिस्ट विद डेस्टिनी) आने वाली हैं . "आधार" आधार कार्ड पर केंद्रित कॉमेडी फिल्म है, "राम प्रसाद कि तेरहवी" एक कॉमेडी व एक सामान्य आदमी के जीवन संघर्ष की कहानी है. वहीँ "ट्रिस्ट विद डेस्टिनी" के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि ये एक विशेष फिल्म है जो कि जवालाल नेहरू के स्पीच("ट्रिस्ट विद डेस्टिनी") पर आधारित है. इस फिल्म में तीन मुख्य चैप्टर (१ रंग को लेकर बवाल, २ जात पात को लेकर, ३ घूसखोरी पर कटाक्ष) है.   

मनीष मुंद्रा एक अच्छे फिल्म निर्माता, कवि व लेखक के साथ साथ एक जिम्मेदार नागरिक हैं. वो समय समय पर लोगों की सहायता करते रहते हैं. उनकी फिल्मे समाज से जुड़े जरुरी मुद्दों पर केंद्रित होती है. जिनमे समाज के लिए सन्देश होता है.



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