हिंदी के लिए महापुरुष कथन:

  • हिंदी किसी के मिटाने से मिट नहीं सकती! ~ चन्द्रबली पाण्डेय
  • है भव्य भारत ही हमारी मातृभूमि हरी भरी! हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा और लिपि है नागरी!! ~ मैथिलीशरण गुप्त
  • जिस भाषा में तुलसीदास जैसे कवि ने कविता की हो वह अवश्य ही पवित्र है और उसके सामने कोई भाषा नहीं ठहर सकती! ~ महात्मा गाँधी
  • हिंदी भारतवर्ष के हृदय-देश स्थित करोड़ों नर-नारियों के हृदय और मस्तिष्क को खुराक देने वाली भाषा है! ~ हज़ारीप्रसाद द्विवेदी
  • हिंदी को गंगा नहीं बल्कि समुद्र बनना होगा! ~ विनोबा भावे
  • हिंदी के विरोध का कोई भी आन्दोलन राष्ट्र की प्रगति में बाधक है! ~ सुभाष चन्द्र बसु
  • हिंदी को संस्कृत से विच्छिन्न करके देखने वाले उसकी अधिकांश महिमा से अपरिचित हैं~ हज़ारीप्रसाद द्विवेदी