स्माइलमैन के नाम से प्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि सर्वेश अस्थाना कविशाला लाइव का हिस्सा बने. उन्होंने व्यंग्य, हास्य व कविता के सन्दर्भ में अपने विचार रखे. इस लाइव वार्ता का संचालन हास्य कवि, व्यंग्यकार व लेखक पंकज प्रसून ने किया.

प्रस्तुत है इस लाइव वार्ता के कुछ अंश.


कविता पर बात करते हुए सर्वेश अस्थाना ने कहा कि कविता ह्रदय के धड़कनो का शाब्दिक अनुवाद है. कविता अनुभूति से आती है. जिस तरह अनुभूति नहीं सिखाई जा सकती ठीक उसी तरह कविता भी नहीं सिखाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि कविता के व्याकरण ,छंद व शब्दों के बारे में तो सिखाया जा सकता है लेकिन जो कविता ह्रदय से निकलती है वो अनुभूति के बिना नहीं लिखी जा सकती.  


हास्य और अश्लीलता के सन्दर्भ में बात करते हुए सर्वेश अस्थाना ने कहा कि हास्य को फूहड़ या अश्लील बनाने में व्यक्ति का योगदान होता है न कि कविता का. कविता कहने वाले के निजी संस्कार, उसका परिवेश कविता को फूहड़ और अश्लील बनाता है. उन्होंने आगे कहा कि हंसी असहज चीजों पर आती है सामान्य चीजों पर नहीं. ठिठोली या मजाक तो हास्य हो सकता है लेकिन फूहड़ता हास्य नहीं हो सकती. सर्वेश अस्थाना कहते हैं कि जो बात किसी व्यक्ति के मान व मर्यादा को ध्यान में रखते हुए मन में गुदगुदी पैदा कर दे वही हास्य है.


कवियों व लेखकों के प्रसांगिग होने की बात पर सर्वेश अस्थाना ने कहा कि कोई भी लेखक या कवि "वो चाहे परसाई हो, तुलसी दास हो या वाल्मीकि हो, वे स्वयं प्रसांगिग नहीं होते. बल्कि किसी कवि या लेखक द्वारा कहे गए शब्द , उसके द्वारा उठाये गए मुद्दे प्रसांगिग होते है. उन्होंने आगे कहा कि कोई भी व्यस्वथा हो वह सभी के लिए सही नहीं हो सकती. व्यवस्थाओं का विरोध हमेशा होता रहेगा. लेकिन जो लेखक या कवि इन व्यवस्थाओं का विरोध मुस्कुराकर करता है वही सही मायने में हास्य कवि या व्यंग्यकार कहलाता है . 


कविशाला के माध्यम से नए कवियों को शंदेश देते हुए उन्होंने कहा कि यदि आप अच्छा लिखना चाहते है तो पढ़िए. आप जितना ज्यादा पढ़ेंगे. जितना अध्यन करेंगे. उतना आपका शब्दकोष बढ़ेगा. शब्दकोष बढ़ने से लिखने में परेशानी नहीं होगी. बिना हडबाये अध्यन करते रहिये. पढ़ते रहिये और लिखते रहिये धीरे धीरे आपकी लेखनी, आपकी कविता में निखार आ जायआ जायेगा.