![Sarvesh Asthana in conversation with Pankaj Prasoon [Aaghaaz Online]'s image](https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/post_pics/%40kavishala-interviews/None/Screenshot_2020-08-22_at_10.45.00_PM.png)
स्माइलमैन के नाम से प्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि सर्वेश अस्थाना कविशाला लाइव का हिस्सा बने. उन्होंने व्यंग्य, हास्य व कविता के सन्दर्भ में अपने विचार रखे. इस लाइव वार्ता का संचालन हास्य कवि, व्यंग्यकार व लेखक पंकज प्रसून ने किया.
प्रस्तुत है इस लाइव वार्ता के कुछ अंश.
कविता पर बात करते हुए सर्वेश अस्थाना ने कहा कि कविता ह्रदय के धड़कनो का शाब्दिक अनुवाद है. कविता अनुभूति से आती है. जिस तरह अनुभूति नहीं सिखाई जा सकती ठीक उसी तरह कविता भी नहीं सिखाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि कविता के व्याकरण ,छंद व शब्दों के बारे में तो सिखाया जा सकता है लेकिन जो कविता ह्रदय से निकलती है वो अनुभूति के बिना नहीं लिखी जा सकती.
हास्य और अश्लीलता के सन्दर्भ में बात करते हुए सर्वेश अस्थाना ने कहा कि हास्य को फूहड़ या अश्लील बनाने में व्यक्ति का योगदान होता है न कि कविता का. कविता कहने वाले के निजी संस्कार, उसका परिवेश कविता को फूहड़ और अश्लील बनाता है. उन्होंने आगे कहा कि हंसी असहज चीजों पर आती है सामान्य चीजों पर नहीं. ठिठोली या मजाक तो हास्य हो
