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Manoj Bajpayee in conversation with Faridoon Shahryar [Kavishala Talks]

"मेरे अभिनय का रहस्य साहित्य है : मनोज बाजपेयी"


दिग्गज फिल्म अभिनेता मनोज बाजपेयी कविशाला टॉक का हिस्सा बने.और अपने जीवन से कई अनसुने पहलू खोले! उन्होंने वर्तमान फिल्मो, साहित्य, एक्टिंग, थियेटर व कविताओं पर चर्चा की! संचालन फिल्मो और मनोरंजन के जाने माने पत्रकार फरीदून शहरयार ने किया, उन्होंने मनोज बाजपाई के कई छुपे हुए रहस्यों से दर्शको के अवगत कराया! जानते हैं इस इस कविशाला टॉक के कुछ अंश -


जब फरीदून शहरयार ने मनोज बाजपाई से उनके साहित्य और फिल्मो के बीच के रिश्ते के बारे में पूछा!

बचपन से रही है कविताओं में रूचि: मनोज बाजपेयी ने बताया कि कविताओं में उनकी रूचि बचपन से रही है. स्कूल में कविताओं का कांटेस्ट होता था. एक बार टीचर ने उन्हें क्लास को रिप्रेसेंट करने को कहा, उन्होंने पहली परफोरमेन्स 'हरिवंश राय बच्चन' जी की कविता पढ़कर दी थी. उन्होंने आगे कहा कि "कविता मेरे संस्कार हैं. मै रोज सुबह उठकर जोर जोर से कविताएं पढ़ता हूँ, मेरा प्रयास रहता है कि मै कविता पढ़ते समय कवि की सोंच उसके तत्कालीन मन-विचार को समझूं."




अभिनय करने और किरदार को समझने में कविताओं की अहम् भूमिका है :- मनोज बाजपेयी कहते है कि कविता अभिनय के लिए बहुत जरुरी है. अगर आपको किरदार को समझना है तो कविताओं में रूचि रखिये, कविताओं को पढ़िए और समझियेगैंग्स ऑफ़ वास्सेपुर के डायलॉग "हजरात हजरात हजरात" के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस डायलॉग में पोएटिक अंदाज था. इसमें एक सुर, ताल और लय थी. ये चीज कविता से आती है. कविता रो

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