[Kavishala Interviews] सोशल मीडिया में सकारात्मक रूप से सक्रिय आपीएस अधिकारी अरुण बोथरा कविशाला टॉक का हिस्सा बने. उन्होंने सोशल मीडिया, साइबर क्राइम, भाषा और साहित्य के सन्दर्भ में चर्चा की. इस कविशाला टॉक का संचालन किया जिनेन्द्र प्रकाश ने. पढ़िए इस कविशाला टॉक का कुछ अंश- 


सोशल मीडिया की शक्ति और प्रभाव के विषय में अरुण जी ने कहा की सोशल मीडिया एक हथियार की तरह है. पिस्टल या किसी अन्य हथियार का उपयोग जुर्म करने वाले भी उपयोग करते हैं और जुर्म रोकने वाले भी लेकिन दोनों के उद्देश्य में फर्क होता है. सोशल मीडिया में बहुत ताकत है. आज के समय में सोशल मीडिया एक क्रांति बनकर उभरा है. जिसकी वजह से हमें कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं. हमें इसका प्रयोग सकारत्मक उद्देश्य से करना चाहिए.


कविशाला के बारे में अरुण जी कहते है की उन्हें :कविशाला के नाम ने प्रभावित व आकर्षित किया. कविशाला पढ़ कर उन्हें लगा की यहाँ (कविशाला में) कविताएं, कहानियां साहित्य आदि की चर्चा होती है.उन्होंने आगे कहा की कविशाला एक अच्छी पहल है. साहित्य पर कार्य करने वाले ऐसे और भी मंच होने चाहिए. जो हम पढ़ते है, देखते है उसी से हमारे विचार विकसित होते है.  


भाषा पर बात करते हुए उन्होंने कहा की वे स्वयं हिंदी माध्यम से पढ़े हुए हैं. वे आज जो भी है उसमे हिंदी भाषा का ही योगदान है. वे कहते हैं की उन्हें हिंदी में लिखना और हिंदी पढ़ना पसंद है. अरुण जी का मानना है कि अपनी मातृ भाषा से प्रेम करना अच्छी बात है लेकिन अन्य भाषाओं का सम्मान करना व नई भाषाओं को सीखना भी आश्यक है. बेशक हम किसी भी दूसरी भाषा को सीखें या जाने लेकिन हमें अपनी मातृ भाषा नहीं छोड़नी चाहिए.


बढ़ते हुए साइबर क्राइम के विषय में वे कहते हैं कि साइबर क्राइम रोकने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है. हमें जागरूक होना पड़ेगा. युवा पीढ़ी को को डिजिटल उपकरणों का प्रयोग करना, डिजिटल लेनदेन करना अच्छी तरह से पता है. लेकिन पुरानी पीढ़ी के लोग और कम पढ़े लिखे लोगों के बीच डिजिटल और साइबर क्राइम के प्रति जागरूकता नहीं है. यदि साइबर क्राइम के बारे में जागरूकता फैलाई जाए तो निश्चित रूप से साइबर अपराधों में कमी लाई जा सकती है.