शानदार अभिनय, बेजोड़ डायलॉग डिलीवरी और फुल एंटरटेनमेंट. यह सबकुछ मिर्जापुर शो में दर्शकों को देखने को मिला. यही कारण है कि लोग इसके किरदारों को आज भी नहीं भूले हैं. फिर चाहे वो मुन्ना भईया (दिव्येन्दू घोष) हो, गुड्डू पंडित (अली फज़ल) हो, या फिर कालीन भईया (पंकज त्रिपाठी), इसके अलावा स्वीटी (श्रेया पिलगांवकर), बबलू भईया (विक्रांत मेसी), और गोलू उर्फ गजगामिनी गुप्ता (श्वेता त्रिपाठी) के अभिनय ने भी लोगों का दिल जीता.


'मिर्जापुर- 1' के ये डायलॉग बहुत कुछ सिखाते हैं:

  • डर की यही दिक्कत है, कभी भी खत्म हो सकता है. [कालीन भैया]
  • 'चुनाव फेयर हो ना हो दिखना चाहिए कि फेयर है डेमोक्रेसी इसी का नाम है बेटा'
  • हमारा नाम अखंडानंद त्रिपाठी है. जिस अखंडा से आप परिचित हैं, वो व्यापारी थे. और हम बाहुबली हैं. [मौर्या से कालीन भैया]
  • शादी कोई खाना खाना थोड़े ही न है कि करना ही है. [गुड्डू पंडित]
  • गन्स की मदद से डर नहीं बढ़ाना है, डर की मदद से गन्स बढ़ानी हैं. [बबलू पंडित]
  • शुरू मजबूरी में किए थे, अब मज़ा आ रहा है [गुड्डू पंडित]
  • तुम इसके लिए हमारे दरवाजे पर चले आए. [कालीन भैया]
  • 'फैमिली, फैमिली होती है, चाहे जैसी भी हो'
  • 'सांप को चाहे जितना भी दूध पिला दो, एक बार दुश्मनी हो गई तो दुश्मन ही रहता है'
  • 'बाकी हर जगह अच्छा काम करके जीतते हैं, बस इलेक्शन ही ऐसी जगह है, जहां जीतते हैं, ताकि, अच्छा काम कर सकें'


मिर्जापुर का दूसरा सीजन 23 अक्टूबर को रिलीज होना है!