रात होते ही,
टिमटिमाते शब्द,
सितारों जैसे तुम्हारे इर्द-गिर्द जमा हो जाते है
कविता तुम्हारा चेहरा चांद जैसा है..
'मिर्जापुर' के वकील साहब रमाकांत पंडित जी को फिल्मी किरदार में देखकर उनकी अदाकारी का अंदाजा तो लग ही गया होगा, कविशाला संवाद में बातचीत के दौरान कई कविताओं को दर्शको के साथ उन्होंने साझा किया था! उनकी लेखनी में संजीदा विषयो को सरलता से कहने की ताकत है! वो चाहे प्रेम हो या फिर शौर्य, पंडित जी आसानी से चांद तक आपको अपनी कविताओं के जरिये पंहुचा देते है!
पंडित जी की कविताओं की किताब जल्द ही पाठको को वाणी प्रकाशन के द्वारा पढ़नेको मिलेगी!
राजेश तैलंग का मानना है, प्रेम इस जगत् के लिए अनुपम उपलब्धि है। प्रेम है तो जीवन है, प्रेम की अनुपस्थिति में जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। मनोभावों की क्रमिक अवस्था में भी प्रेम सर्वोपरि भाव है। असल में प्रेम एक ऐसी अुनुभूति है, जो चित्त को ऊंचाई देती है।
कहानी में एक आदि होता है,
कहानी में एक मध्य होता है,
कहानी में एक अंत होता है,
और जो तेरे मेरे मध्य होता है,
वही तो कविता का असल छन्द होता है।
इस तरह की अनेक कवितायेँ आपको उनकी आने वाली किताब में पढ़ने को मिलेंगी!

