“एक अच्छा लेखक अपनी कलम से समाज की तस्वीरों को उकेरता है”. 


साहित्य से सम्बंधित आज के दिन के कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों से सम्बंधित साहित्य और उनकी यात्राएं:


सुनीता जैन (13 जुलाई,1941– 11 दिसंबर,2017)


सुनीता जैन भारतीय साहित्य जगत की एक प्रमुख हस्ती हैं, जिनका लेखन हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में समान रूप से प्रभावशाली है। वह एक विद्वान, उपन्यासकार, लघु-कथाकार और कवित्री थीं। उन्होंने कई जैन और कुछ हिंदी साहित्यों का अंग्रेजी में अनुवाद किया था। उन्होंने 22 वर्ष की आयु से ही लिखना प्रारंभ कर दिया था। सुनीता जैन ने अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं को मिलाकर 70 से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित की। उन्होंने हिंदी में अपने लेखन पर मुख्य रूप से 1980 के दशक के मध्य से ध्यान केंद्रित किया। उनकी लेखन शैली में नारीवादी दृष्टिकोण और समाज में स्त्रियों की स्थिति पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। उन्होंने अपनी रचनाओं को बहुत ही शुद्ध हिंदी में लिखा है, जिससे उन्हें भारत और दुनिया भर में हिंदी साहित्य समुदाय में महत्वपूर्ण पहचान और प्रशंसा मिली। उनकी प्रमुख कृतियों में 'क्षमा', 'दूसरे दिन', 'उठो माधवी', 'प्रेम में स्त्री' इत्यादि शामिल हैं। उन्हें अपने योगदान के लिए अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिसमें महादेवी वर्मा, साहित्य भूषण, निराला नामित सम्मान, व्यास सम्मान और पद्मश्री प्रमुख हैं। सुनीता जैन को हिंदी साहित्य के धरोहर के रूप में सदैव स्मरण किया जाता है एवं किया जाएगा।


आशापूर्णा देवी (8 जनवरी,1909 – 13 जुलाई,1995)

आशापूर्णा देवी बांगला भाषा की एक प्रसिद्ध कवियत्री और उपन्यासकार थीं। उनका वास्तविक नाम आशापूर्णा देवी गुप्ता था। उन्होंने अपने लेखन की शुरुआत मात्र 13 वर्ष की आयु से की। प्रारंभ में उन्होंने अपने साहित्यिक करियर की शुरुआत बाल साहित्य से की और धीरे-धीरे बंगाली साहित्य की एक प्रमुख हस्ती बन गई। उनका पहला कहानी-संकलन "जल और जामुन" था जो 1940 में बंगाल से प्रकाशित हुआ। आशापूर्णा देवी ने अपने सम्पूर्ण जीवन काल में 200 से अधिक उपन्यास और 2000 से अधिक लघु कहानियां लिखी हैं। उनकी लेखनी में महिलाओं की समस्याओं और समाज में उनके स्थान का चित्रण प्रमुखता से होता है। उनकी कहानियाँ हमारे घर-परिवार का विस्तार हैं, जिन्हें वे कभी नन्ही बेटी की मासूमियत से, तो कभी किशोरी की चंचलता से, और कभी माँ की ममता भरी दृष्टि से नवीनता और जिज्ञासा के साथ प्रस्तुत किया।उनकी कुछ प्रमुख कृतियों में ‘प्रथम प्रतिश्रुति’, ‘आकाश माटी’, ‘बकुलकथा’ और ‘प्रेम ओ माटी’ आदि सम्मिलित हैं। उन्हें साहित्य में अद्वितीय योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें ज्ञानपीठ, टैगोर, लीला, पद्मश्री आदि प्रमुख हैं। उनकी रचनाएँ आज भी पाठकों को प्रेरित करती हैं और साहित्य जगत में उनका योगदान अमूल्य है।


लेखक/ लेखिका: रचियेता वैष्णव (कविशाला - Content Writer)