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नारीवादी कार्यकर्ता कमला भसीन को श्रद्धांजलि अर्पित!!

मेरा बलात्कार मेरे समुदाय के सम्मान को दूषित नहीं करता है

-कमला भसीन



सुप्रसिद्ध लेखिका और समाजिक कार्यकर्ता कमला भसीन, जिन्होंने अपनी लेखनी से महिलाओं की आवाज को बुलंद करने का कार्य किया, आज 75 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। कमला भसीन कुछ महीने पहले कैंसर की शिकार हो गयी थीं। बताया जा रहा है कि नारीवादी कार्यकर्ता भसीन ने करीब तीन बजे अंतिम सांस ली। आज उनके यूँ चले जाने से महिलावादी आंदोलन सहित सभी जन आंदोलनों की अपूरणीय क्षति हुई है। महिला उत्थान के लिए उन्होंने विशेष रूप से कार्य किया है साथ ही अपनी लेखनी से निरंतर महिलाओ का उत्साह बढ़ने का प्रयास किया है।आपको बता दें कमला भसीन दक्षिण एशियाई देशों में नारीवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने में भी एक अहम् भूमिका निभाई थी।भसीन का जन्म, 24 अप्रैल, 1946 को वर्तमान पाकिस्तान के मंडी बहाउद्दीन ज़िले में हुआ था। वे ख़ुद को ‘आधी रात की संतान’ कहती थीं , जिसका संदर्भ विभाजन के आसपास पैदा हुई उपमहाद्वीप की पीढ़ी से है। 

आपको बता दें 2002 में, बेसिन ने नारीवादी नेटवर्क 'संगत' की स्थापना की, जो ग्रामीण और आदिवासी समुदायों की वंचित महिलाओं के साथ कार्य करती है। 

भसीन ने पितृसत्ता और लिंग के बारे में किताबें और पुस्तिकाएं भी लिखी थीं। वहीँ उनके काम का 30 भाषाओं में अनुवाद भी किया गया है।


बसिन द्वारा लिखी कुछ विशेष पुस्तकें :


लाफिंग मैटर्स (laughing matters) :उनकी किताबों में से एक,लाफिंग मैटर्स (laughing matters) jo पहली बार 2005 में प्रकाशित हुई थी और 2013 में पुनर्प्रकाशित हुई थी।और साथ ही इसका एक हिंदी संस्करण भी है जिसका नाम हसन तो संघर्षो में भी जरूरी है। 


बॉर्डर & बौंडरीएस (Borders & Boundaries):अपनी इस किताब में बेसिन ने, भारत के विभाजन के समय महिलाओं के अनुभवों के बारे में बताया है।

  

अंडरस्टैंडिंग जेंडर(understanding gender) : उनका एक अन्य लेखन "जेंडर को समझना" है जो लिंग और महिला , लिंग और विकास, लिंग और पितृसत्ता के बिच के बिच सम्बन्धो की व्याख्या करता है। 


पितृसत्ता क्या है?( what is patriarchy):

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