कबीर दास's image
Share0 Bookmarks 72858 Reads0 Likes

क ऐसे व्यक्ति जिनके दोहे आज भी मन की बातो को बताने के लिए सुनाए जाते है, इतिहास गवाह है, की जब-जब किसी ने समाज में सुधार लाने की कोशिश की है तो उसे समाज दरकिनार कर देती है और केवल उन्हीं नामों को इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुए हैं जो समाज से बिना डरे अपने इरादों में अडिग रहे।और यहाँ जिनकी बात हो रही है वह कबीर दास जी है। कबीर दास जी के भजन और दोहे आज भी घर-घर में बजाये जाते हैं और यह प्रदर्शित करता है की वे अपने आप में एक बहुत बड़े महात्मा थे। कबीर दास जी की वास्तविक जन्म तिथि किसी को मालूम नहीं, लेकिन उनके काल के आधार पर ऐसा माना जाता है की उनका जन्म 1398 में काशी में हुआ था। वास्तव में उनका जन्म एक विधवा ब्राह्मणी की गर्भ से हुआ था जिसने कोक-लाज के डर से इन्हें एक तालाब के समीप रख दिया और यहाँ से एक जुलाहा जोड़े ने उन्हें पाया और अपने पुत्र की तरह इन्हें पाला। इन्होंने बहुत अधिक शिक्षा नहीं प्राप्त की, परन्तु शुरू से ही साधु-संतों के संगत में रहे और इनकी सोच भी बेहद अलग थी। वे शुरू से हमारे समाज में प्रचलित पाखंडों, कुरीतियों, अंधविश्वास, धर्म के नाम पर होने वाले अत्याचारों का खंडन और विरोध करते थे, और शायद यही वजह है की इन्होंने निराकार ब्रह्म की उपासना की। इनपर स्वामी रामानंद जी का बेहद प्रभाव था। कबीर दास जी ने अपनी धार्मिक शिक्षा स्वामी रामानंद जी से ली। वे बेहद ज्ञानी थे और स्कूली शिक्षा न प्राप्त करते हुए भी अवधि, ब्रज, और भोजपुरी व हिंदी जैसी भाषाओं पर इनकी सामान पकड़ थी। इन सब के साथ-साथ राजस्थानी, हरयाणवी, खड़ी बोली जैसी भाषाओं में महारथी थे। उनकी रचनाओं में सभी भाषाओं की झांकी मिल

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts