
ज़िंदगी गो कुश्ता-ए-आलाम है
फिर भी राहत की उम्मीद-ए-ख़ाम है
हाँ अभी तेरी मोहब्बत ख़ाम है
तेरे दिल में काविश-ए-अंजाम है
इश्क़ है मैं हूँ दिल-ए-नाकाम है
इस के आगे बस ख़ुदा का नाम है
आ कहाँ है तू फ़रेब-ए-आरज़ू
आज
Read More! Earn More! Learn More!
