
ये फ़लक ये माह-ओ-अंजुम ये ज़मीन ये ज़माना
तिरे हुस्न की हिकायत मिरे इश्क़ का फ़साना
ये है इश्क़ की करामत ये कमाल-ए-शाइराना
अभी मुँह से बात निकली अभी हो गई फ़साना
ये मिरा पयाम कहना तू सबा मुअद्दबाना
कि गुज़र गया है प्यारे त
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