यहाँ हर वादा बेकार रह जाएगा
अपने हिस्से इंतजार रह जाएगा।
ये जो थोड़ा सा बच गया हूँ मैं
उसमें भी इक बाज़ार रह जाएगा।
हाथों से छीना हमने इस तरह
दिल में वो हथियार रह जाएगा।
चुनाव का मौसम है तो चादर है
फिर से नंगा ये मज़ार रह जाएगा।
मोबाइल ,टीवी,टैबलेट सब हैं यहाँ
फ़िर कोने में अख़बार रह जाएगा।
वो आया महज़ सोने चाँदी लेकर
खाली हाथ वो खरीदार रह जाएगा।
मुहब्बत का खुराक मिलता नहीं
भूखा,नंगा मेरा ऐतबार रह जाएगा।