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वृक्षत्व - नरेश मेहता

माधवी के नीचे बैठा था कि हठात् विशाखा हवा आयी और फूलों का एक गुच्छ मुझ पर झर उठा; माधवी का यह वृक्षत्व मुझे आकण्ठ सुगंधित कर गया । उस दिन एक भिखारी ने भीख के लिए ही तो गुहारा था और मैंन
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