माधवी के नीचे बैठा था कि हठात् विशाखा हवा आयी और फूलों का एक गुच्छ मुझ पर झर उठा; माधवी का यह वृक्षत्व मुझे आकण्ठ सुगंधित कर गया । उस दिन एक भिखारी ने भीख के लिए ही तो गुहारा था और मैंने द्वाराचार में उसे क्या दिया ?- उपेक्षा, तिरस्कार और शायद ढेर से अपशब्द । मेरे वृक्षत्व के इन फूलों ने निश्चय ही उसे कुछ तो किया ही होगा, पर सुगंधित तो नहीं की । सबका अपना-अपना वृक्षत्व है ।