
वो हम से आज भी दामन-कशाँ चले है मियाँ
किसी पे ज़ोर हमारा कहाँ चले है मियाँ
जहाँ भी थक के कोई कारवाँ ठहरता है
वहीं से एक नया कारवाँ चले है मियाँ
जो एक सम्त गुमाँ है तो एक सम्त यक़ीं
ये ज़िंदगी तो यूँही दरमियाँ चले है मियाँ
बदलते रहते हैं बस नाम और तो क्या है
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