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ऊब - श्रीकांत वर्मा

स्वेद में डूबे हुए सब जन्म पर पछता रहे हैं पालने में शिशु। चौंक या खिसिया रहे या पेड़ पर फन्दा लगा कर आत्महत्या कर रहे हैं शहर के मैदान। उमस में डूबे हुए हैं घर सबेरा घोंसले और घास आ रहा या जा रहा है बक रहा या झक रहा है निरर्थक कोई किसी के पास। मृत्युधर्मी प्रेम अथवा प्रेमधर्मी मृत
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