तुम्हारे दिन लौटेंगे बार-बार मेरे नहीं । तुम देखोगी यह झूमती हरियाली पेड़ों पर बरसती हवा की बौछार यह राग-रंग तुम्हारे लिए होंगी चिन्ताएँ अपरम्पार ख़ुशियों की उलझन तुम्हारे लिए होगी थकावटें, जंगल का महावट पुकारेगा तुम्हें बार-बार । फ़ुर्सत ढूँढ़ोगी जब-तब थकी-हार तब तुम आओगी पाओगी मुझे झुँझलाओगी सो जाओगी कड़ियाँ गिनते-गिनते सौ बार । इसी तरह आएगी बहार चौंकाते हुए तुम्हें तुम्हारे दिन ।