तू वफ़ा करे न करे रंज नहीं,
मैं तुझसे मोहब्बत बिन मतलब के करता हूँ
मैं दुनिया की भले ही परवाह ना करूँ,
पर तेरे बारे में सब ख़बर रखता हूँ
मेरे ख़्वाब तो उड़ते परिंदों की तरह आज़ाद हैं, लेकिन,
सब लोगों से हमेशा झुक कर मिलता हूँ
इतनी ठोकरें दी ज़माने ने मुझे,
अब मैं बहुत संभल कर पाँव रखता हूँ
कोई कैसे भी पेश आए मुझसे,
मै अपने सलीक़े में अदब रखता हूँ
हमेशा ख़ुशी तो नहीं मिली किसी को भी ज़माने में,
जो लमहें गुज़ारे तेरे साथ बस उन्हीं को सोच सोच कर मचलता हूँ
दवा क्या रंग लाए पता नहीं,
मैं अपने ख़ुदा पर यक़ीन और दुआओं में असर रखता हूँ
दिल किसने देखा है और यह कौन परखेगा, ज़ुबान मीठी और लहजे का हुनर रखता हूँ
ग़म बहुत हैं मेरे दिल-ए अब्र में,
लेकिन बरसने में सब्र रखता हूँ
घबराया मैं कभी नहीं मुश्किलों से,
हर आज़मायिश-ए-दौर में डट के लड़ने का जज़्ब रखता हूँ
पास मेरे कोई दौलत-ए-जागीर नहीं,
बस बुज़ुर्गों की दुआ-ए-दौलत पे गुज़र करता हूँ