तू तो सौंदर्य का विकास लगे
काम-रति का निजी निवास लगे
संगमरमर-सा रंग देख तेरा
चाँद पूनम का भी उदास लगे
रात के समय जब कभी निकले
घुप अँधेरे में भी उजास लगे
है खिला बसंत-सा यौवन
तन में कस्तुरी की सुवास लगे
तेरे होठों से रसकलश छलके
तेरी झिड़की में भी मिठास लगे
मूर्ति है तू कोई 'अजन्ता' की
कभी खजुराहो का इतिहास लगे
दृष्टि से मेरी दूर रहकर भी
मेरे मन के तू आसपास लगे
तू भले हो इक आम लड़की-सी
पर मुझे तो हमेशा खास लगे
भूख मन की भले छुपा ले तू
तेरी आँखों में एक प्यास लगे
यूँ न भरमा मुझे अदाओं से
तेरी मुस्कान इक प्रयास लगे
रूप में तू विराट है लेकिन
लाज से सिमिट कर 'समास' लगे