
तू भूल गया रे बेटा मुझको।
तेरे पैदा होते ही पूरा गाँव सजाया था
जब तू रोया ज़ोर ज़ोर से
अपने इन्हीं हाथों से मैंने ,तुझको सहलाया था
तू भूल गया रे बेटा मुझको।
तेरी छोटी बातों को सर माथे पर रखा था
लाख बुरा कहे कोई ,तू मेरा ही तो बच्चा था
तू भूल गया रे बेटा मुझको।
तेरी नादान जवानी ने भी खूब नाम किआ मेरा था
तेरी हर इक मनमानी ने भी मजबूर किआ मुझको था
तेरे दुःख में दुखी हुआ मैं ,तेरे सुख में सुखी रहा
आज कैसे उन लम्हों को भूल आगे निकल गया रे तू
तू भूल गया रे बेटा मुझको।
जब तू पहली दफ़ा ,दाखिल हुआ स्कूल में था,
रात को जग कर किताबों में ,जिल्दें लगा कर लाया मैं था
सुबह की वर्दी धोयी माँ ने , ईस्त्री करा कर लाया मैं था
तेरे मन में अब क्यूँ मेरे अरमान उतरते नहीं हैं
अब कैसे उस थामी ऊँगली को हवा दे निकल गया तू
तू भूल गया रे बेटा मुझको।
तेरी ज़िद को पूरा करते , तेरे सपने में रंग गया था
तेरी खातिर अपने मन की कई जटिलतायें सुलझा गया था
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