तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ यह कैसी तन्हाई है's image
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तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ यह कैसी तन्हाई है

तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ यह कैसी तन्हाई है तेरे साथ तेरी याद आई, क्या तू सचमुच आई है शायद वो दिन पहला दिन था पलकें बोझल होने का मुझ को देखते ही जब उन की अँगड़ाई शरमाई है उस दिन पहली बार हुआ था मुझ को रफ़ाक़ात का एहसास जब उस के मलबूस की ख़ुश्बू घर पहुँचाने आई है हुस्न से अर्ज़ ए शौक़ न करना हुस्न को ज़ाक पहुँचाना है हम ने अर्ज़ ए शौक़ न कर के हुस्न को ज़ाक पहुँचाई है हम को और तो कुछ नहीं सूझा अलबत्ता उस के दिल में सोज़ ए रक़बत पैदा कर के उस की नींद उड़ाई
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