
तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है
सीना किस का है मिरी जान जिगर किस का है
ख़ौफ़-ए-मीज़ान-ए-क़यामत नहीं मुझ को ऐ दोस्त
तू अगर है मिरे पल्ले में तो डर किस का है
कोई आता है अदम से तो कोई जाता है
सख़्त दोनों में ख़ुदा जाने सफ़र किस का है
छुप रहा है क़फ़स-ए-तन में जो हर
Read More! Earn More! Learn More!
