तिनका बयारि के बस। ज्यौं भावै त्यौं उडाइ लै जाइ आपने रस॥ ब्रह्मलोक सिवलोक और लोक अस। कह 'हरिदास बिचारि देख्यो, बिना बिहारी नहीं जस॥