जो भी पैदा हुआ है उसको एक दिन मरना पड़ता है
देहकां की मज़बूरी जिसको हर दिन मरना पड़ता है
सारे देश की भूख मिटाने को जो मेहनत करता है
देश बता क्यूँ उसको अक़्सर फ़ाक़ा रखना पड़ता है
राजनीति में हर दल ने बस भरमाया है और छला
अधिकारों की मांग पे उसको मौत से लड़ना पड़ता है
गोरे अंग्रेजों को देखा, अब देखे काले अंग्रेज
तब भी रोना पड़ता था और अब भी रोना पड़ता है
उसकी फसल का मूल्य लगाते नेता,लाला और दलाल
किस व्यापारी को बाजार में, ऎसा सहना पड़ता है
एक अंगौछे की ख़ातिर भी वो तो जीता मर मर कर
बिचौलियों के गले हमेशा स्वर्ण का गहना पड़ता है


