सूरज की पेशी - कन्हैयालाल नंदन's image
707K

सूरज की पेशी - कन्हैयालाल नंदन

आँखों में रंगीन नज़ारे सपने बड़े-बड़े भरी धार लगता है जैसे बालू बीच खड़े । बहके हुए समंदर मन के ज्वार निकाल रहे दरकी हुई शिलाओं में खारापन डाल रहे मूल्य पड़े हैं बिखरे जैसे शीशे के टुकड़े. ! नजरों के ओछेपन जब इतिहास रचाते हैं पिटे हुए मोहरे
Read More! Earn More! Learn More!