
सुब्ह होता है शाम होता है
ख़ून-ए-नाहक़ मुदाम होता है
फेर लेते हो मुँह हिक़ारत से
ये जवाब-ए-सलाम होता है
ख़ौफ़ आता है जिस को मरने से
उस का जीना हराम होता है
आ के रिंदों में हो शरीक ऐ शैख़
छुप के पीना हराम होता है
क
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