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सुब्ह होता है शाम होता है - मेला राम 'वफ़ा'

सुब्ह होता है शाम होता है ख़ून-ए-नाहक़ मुदाम होता है फेर लेते हो मुँह हिक़ारत से ये जवाब-ए-सलाम होता है ख़ौफ़ आता है जिस को मरने से उस का जीना हराम होता है आ के रिंदों में हो शरीक ऐ शैख़ छुप के पीना हराम होता है क
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