
रात मीठी चांदनी है,
मौन की चादर तनी है,
एक चेहरा ? या कटोरा सोम मेरे हाथ में
दो नयन ? या नखतवाले व्योम मेरे हाथ में?
प्रकृति कोई कामिनी है?
या चमकती नागिनी है?
रूप- सागर कब किसी की चाह में मैले हुए?
ये सुवासित केश मेरी बांह पर फैले हुए:
ज्योति में छाया बनी है,
देह से छाया घनी है,
वासना के ज्वार उठ-उठ चंद्रमा तक खिंच रहे,
ओंठ
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