श्री सूर्यकांत त्रिपाठी के प्रति - सुमित्रानंदन पंत's image
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श्री सूर्यकांत त्रिपाठी के प्रति - सुमित्रानंदन पंत

छंद बंध ध्रुव तोड़, फोड़ कर पर्वत कारा अचल रूढ़ियों की, कवि! तेरी कविता धारा मुक्त अबाध अमंद रजत निर्झर-सी नि:सृत-- गलित ललित आलोक राशि, चिर अकलुष अविजित! स्फटिक शिलाओं से तूने वाणी का मंदिर शिल्पि, बनाया,-- ज्योति कलश निज यश का घर चित्त। शिलीभूत सौन्दर्य ज्ञान आनंद अ
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