
हिन्दी के कवियों को जैसे
गीत-गवास लगा करती है
या नेता टाइप लाला को
नाम-छपास लगा करती है।
मथुरा के पंडों को लगती
है खवास औरों के घर पर
उसी तरह श्रोतागण पाकर
मुझे कहास लगा करती है।
पढ़ते वक्त मुझे बचपन में
अक्सर प्यास लगा करती थी,
और गणित का घंटा आते
शंका खास लगा करती थी।
बड़ा हुआ तो मुझे इश्क के
दौरे पड़ने लगे भंयकर,
हर लड़की की अम्मा मुझको
अपनी सास लगा करती थी।
कसम आपकी सच कहता हूं
मुझको सास बहुत प्यारी है,
जिसने मेरी पत्नी जाई
उस माता की बलिहारी है!
जरा सोचिए, अगर विधाता
जग में सास नहीं उपजाते,
तो हम जैसे पामर प्राणी
बिना विवाह ही रह जाते।
क
Read More! Earn More! Learn More!
