सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको जो दरीचा भी खुले तू नज़र आए मुझको॥ सदियों का रस जगा मेरी रातों में आ गया मैं एक हसीन शक्स की बातों में आ गया॥ जब तस्सवुर मेरा चुपके से तुझे छू आए देर तक अपने बदन से तेरी खुशबू आए॥ गुस्ताख हवाओं की शिकायत न किया कर उड़ जाए दुपट्टा तो खनक कर॥ रुम पूछो और में न बताउ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं॥ रात के सन्नाटे में हमने क्या-क्या धोके खाए है अपना ही जब दिल धड़का तो हम समझे वो आए है॥