वाहन मराल कर पुस्तक ओ वीन माल सुन्दर वसन स्वच्छ सोभे जनु चानी के। सिंह पेसवार लीन्हे शूल करवाल धारे हियख्याल प्रेम शिव वर दानी के।। भक्तन को देत बुद्धि विद्या धन सम्पति इ नाम अवलम्ब एक मूढ़ अभिमानी के। पूजन सरोज पद करत प्रणाम सदा सेवक कहावे मातु शारदा भवानी के।।