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सर ये फोड़िए

सर येह फोड़िए अब नदामत में नीन्द आने लगी है फुरकत में हैं दलीलें तेरे खिलाफ मगर सोचता हूँ तेरी हिमायत में इश्क को दरम्यान ना लाओ के मैं चीखता हूँ बदन की उसरत में ये कुछ आसान तो नहीं है कि हम रूठते अब भी है मुर्रबत में वो जो तामीर होने वाली थी लग गई आग उस इमारत में वो खला है कि सोचता हूँ मैं उस
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