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सपने में तिरबेनी काका पैसा-पैसा चिल्लाते हैं - जयप्रकाश त्रिपाठी

सपने में तिरबेनी काका पैसा-पैसा चिल्लाते हैं आँय-बाँय अब कोउ नाय है, दाएँ-बाएँ सब साँय-साँय है नेहरू जी की चाँय-चाँय है गाँधी जी की काँय-काँय है झूमा-झटकी झाँय-झाँय है मची चुनावी ठाँय-ठाँय है चोर-चपाटी, गुण्डा-सुण्डा अब तो जन-गण-मन गाते हैं सपने में तिरबेनी काका पैसा-पैसा चिल्लाते हैं.....। कूकर के दो आगे कूकर कूकर के दो पीछे कूकर आगे कूकर, पीछे कूकर जनता पूछे — कितने कूकर लोकतन
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