
सपने में तिरबेनी काका पैसा-पैसा चिल्लाते हैं
आँय-बाँय अब कोउ नाय है,
दाएँ-बाएँ सब साँय-साँय है
नेहरू जी की चाँय-चाँय है
गाँधी जी की काँय-काँय है
झूमा-झटकी झाँय-झाँय है
मची चुनावी ठाँय-ठाँय है
चोर-चपाटी, गुण्डा-सुण्डा अब तो जन-गण-मन गाते हैं
सपने में तिरबेनी काका पैसा-पैसा चिल्लाते हैं.....।
कूकर के दो आगे कूकर
कूकर के दो पीछे कूकर
आगे कूकर, पीछे कूकर
जनता पूछे — कितने कूकर
लोकतन
Read More! Earn More! Learn More!
